Jan 29, 2013

Mega Suryanamaskar Event

आज से 350 वर्ष पूर्व समर्थ गुरु रामदास ने गाँव-गाँव में सूर्यनमस्कार को प्रचलित किया था। छत्रपति शिवाजी की सेना बनी व स्वराज्य का गौरवमय इतिहास लिखा गया। सूर्यनमस्कार राष्ट्रनिर्माण का मार्ग सिद्ध हुआ। सूर्यनमस्कार के नियमित अभ्यास से शरीर बलवान व लचीला, मन एकाग्र व शांत, बुद्धि तीक्ष्ण व समग्र तथा भावना संतुलित व उदात्त बनने के साथ ही आध्यात्मिक उन्नति भी होती है। सूर्यनमस्कार के सामूहिक अभ्यास से चमुत्व भाव (टीम स्पिरिट) का विकास व राष्ट्रनिर्माण का संस्कार सहजता से हो जाता है। आयोजन की भव्यता से समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित होता है। कार्यकर्ता, शिक्षक एवं समाज के प्रबुद्ध वर्ग में आत्मविश्वास का संचार होता है। स्वामी विवेकानन्द हमेशा कहा करते थे- ‘हमारे देश को चाहिए लोहे की मांसपेशियां और फौलाद के स्नायु। ऐसा शक्तिशाली शरीर और मन कि जिसका अवरोध दुनिया की कोई ताकत न कर सके।' स्वामीजी के इस शक्तिदायी विचार को ध्यान में रखते हुए भारत को शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक और अध्यात्म के बलार्जन का संदेश देने के लिए स्वामी विवेकानन्द सार्ध शती समारोह समिति ओर से देशभर ‘सूर्यनमस्कार महायज्ञ' का आयोजन किया जा रहा है। स्वामी विवेकानन्द की 150वीं जयंती उपलक्ष्य में आयोजित इस उपक्रम का विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक तथा विद्यार्थियों ने हार्दिक स्वागत किया है। इसके लिए सबसे पहले नागपुर सभी विद्यालयों के चयनीत विद्यार्थियों का अग्रेसर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। तत्पश्चात विद्यालयों में उन प्रशिक्षित विद्यार्थियों के माध्यम से अन्य छात्र-छात्राओं को सूर्यनमस्कार का प्रशिक्षण दिया जाएगा। सोमवार दि.18 फरवरी, 2013 को सम्पन्न होने वाले इस सूर्यनमस्कार महायज्ञ के लिए नागपुर के सभी विद्यालयों से संपर्क किया जा रहा है। नगर के सभी विद्यालयों के प्रचार्य, शिक्षक, छात्र-छात्राएं तथा अभिभावकों से आह्वान किया जाता है कि इस सामूहिक सूर्यनमस्कार के अभिनव आयोजन में सहभागी होकर स्वामीजी के इस सार्ध शती के अवसर पर उन्हें वीरता से पूर्ण कृति अर्थात ‘सामूहिक सूर्यनमस्कार' के द्वारा नमन करें।


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